श्री गणपती स्तोत्र

|| श्री गणेशाय नमः || 

 

साष्टांग नमन हे माझे | गौरीपुत्रा विनायका |

भक्ति ने स्मरता नित्य | आयु कामार्थ साधती |

प्रथम नाव वक्रतुंड | दुसरे एकदंत ते |

तिसरे कृष्णपिंगाक्ष | चौथे गजवक्र ते |

पाचवे श्रीलंबोदर | सहावे विकट नाव ते |

सातवे विघ्नराजेंद्र | आठवे धुम्रवर्ण ते |

नववे श्रीभालचंद्र | दहावे श्रीविनायक |

अकरावे गणपती | बारावे श्रीगजानन |

देव नावे अशी बारा | तीन संध्या म्हणे नर |

विघ्न भीती नसे त्याला | प्रभू तू सर्व सिद्धिदे |

विद्यार्थ्याला मिळे विद्या | धनार्थाला मिळे धन |

पुत्रार्थाला मिळे पुत्र | मोक्षार्थाला मिळे गति |

जपता गणपति स्तोत्र | सहा मासात हे फळ |

एक वर्ष पूर्ण होता | मिळे सिद्धि न संशय |

नारदांनी रचिलेले | झाले सम्पूर्ण स्तोत्र हे |

श्रीधराने मराठीत | पठण्या  अनुवादिले |

इति श्री गणपती स्तोत्र संपूर्ण||


    || गणपती बाप्पा मोरया ||

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